अजय 40 साल का था। उम्र ने उसके चेहरे पर हल्की झुर्रियां और आंखों में अनुभव की चमक दे दी थी, लेकिन दिल अब भी मासूम था। वह एक साधारण, समझदार और गंभीर स्वभाव का आदमी था। जीवन की ठहराव भरी दिनचर्या में रिया का आगमन मानो किसी सर्द रात में सूरज की पहली किरण जैसा था।
रिया 25 साल की थी। उसकी हंसी में मासूमियत थी, उसकी बातों में चंचलता। वह बिंदास, खिलखिलाने वाली और जिंदगी से भरी हुई लड़की थी।
प्यार की शुरुआत
उनकी मुलाकात ऑनलाइन हुई। शुरू में बातें सामान्य रहीं, लेकिन धीरे-धीरे अजय रिया की हंसी और मासूम शब्दों का दीवाना हो गया।
एक रात रिया ने मजाक में कहा—
"अजय, काश हम दोनों एक ही छत के नीचे रहते… फिर रोज रात को छत पर बैठकर बातें करते।"
अजय मुस्कुराया—
"और मैं रोज तुम्हें अपनी कहानियां सुनाता, और तुम हर बात पर खिलखिलाकर हंसती।"
रिया ने ठिठोली करते हुए जवाब दिया—
"तुम्हारे साथ रहना मुझे अच्छा लगता है… तुम मुझे समझते हो। काश, हम हमेशा ऐसे ही साथ रह पाते।"
उस दिन के बाद अजय के दिल में रिया के लिए प्यार और गहरा हो गया।
"रिया, क्या तुम्हें लगता है कि एक दिन हम एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे?"
रिया ने धीरे से कहा—
"अजय, मुझे तुमसे प्यार है। तुम अलग हो, सच्चे हो। शायद इसलिए मैं तुम्हें इतना चाहती हूं।"
प्यार का जुनून
अजय हर दिन रिया का इंतजार करता। उनकी रातें फोन कॉल्स में बीततीं। कभी-कभी रिया कहती—
"अजय, अगर कभी तुम मुझे देख नहीं पाओगे तो?"
अजय तुरंत जवाब देता—
"तो मेरी सांसें भी थम जाएंगी। तुम ही मेरी जिंदगी हो।"
वह अक्सर सोचता—
"मुझे इस उम्र में प्यार नहीं करना चाहिए था… पर क्या करूं, रिया तो मेरे दिल की धड़कन बन गई है।"
कहानी: "अधूरी मोहब्बत का सफर" (भाग 2)
अजय की जिंदगी अब रिया से शुरू होकर रिया पर ही खत्म होती थी। सुबह आंख खुलते ही वह सबसे पहले उसका मैसेज देखता और रात को सोने से पहले उसकी आवाज सुनने के बिना नींद नहीं आती।
लेकिन एक दिन कुछ अजीब हुआ—
चुप्पी का दिन
उस दिन अजय और रिया का कोई संपर्क नहीं हुआ। अजय ने कई बार फोन किया, मैसेज भेजा, मगर रिया ने जवाब नहीं दिया।
शाम को उसने अचानक रिया का सोशल मीडिया देखा। वहां एक सैड स्टोरी लगी हुई थी।
अजय के मन में हलचल मच गई।
"हमारे बीच सब ठीक है, तो फिर वह उदास क्यों है? क्या कुछ ऐसा है जो मुझसे छुपा रही है?"
रात को करीब 10 बजे रिया का फोन आया।
"हाय अजय… सॉरी, आज थोड़ा व्यस्त थी।"
अजय का गुस्सा फूट पड़ा—
"रिया, तुम्हारे पास सबके लिए समय है, लेकिन मेरे लिए नहीं? सोशल मीडिया पर उदास स्टोरी डालने का समय है, मगर मुझे बताने का नहीं?"
रिया थोड़ी नाराज हो गई।
"तुम्हें क्यों लगता है कि मैं सब तुम्हें बताऊं? कभी-कभी इंसान का मूड खराब होता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह तुमसे दूर हो रहा है।"
अजय चुप हो गया। वह जानता था कि वह अपनी असुरक्षा में ज्यादा बोल रहा है। थोड़ी देर की चुप्पी के बाद रिया ने उसकी आवाज में प्यार भरते हुए कहा—
"पागल हो क्या? गुस्सा हो मुझसे? तुम जानते हो न, मैं तुम्हें प्यार करती हूं।"
अजय का दिल पिघल गया।
"मुझे डर लगता है तुम्हें खोने का… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, रिया।"
"मैं भी, अजय। अब गुस्सा नहीं, प्यार की बातें करो।"
प्यार की बातें और अचानक एक सच
फोन पर उनकी लंबी और प्यार भरी बातें चल रही थीं।
रिया ने कहा—
"अजय, कभी लगता है कि हम एक ही घर में होते, तो शायद पूरी दुनिया हमें देखकर जलती।"
अजय मुस्कुराया—
"मैं हर रात तुम्हें अपने पास बैठाकर कहानियां सुनाता। तुम हंसती, मैं तुम्हें देखता रह जाता।"
तभी अचानक रिया थोड़ी गंभीर हो गई।
"अजय, तुम्हें कुछ बताना है। एक लड़का है, जो बार-बार मुझे कॉल करता है। प्रपोज कर रहा है।"
अजय के दिल पर जैसे किसी ने चोट कर दी।
"क्या? तुम उससे बात करती हो?"
"नहीं, मैं बात नहीं करती। पर वह कोशिश करता रहता है।"
अजय की आवाज बदल गई—
"रिया, प्लीज ऐसे लोगों से दूर रहो। उसे ब्लॉक कर दो। मुझे अच्छा नहीं लगता।"
रिया ने हंसते हुए कहा—
"तुम पागल हो, मैं तो तुम्हें चाहती हूं। कोई और मुझे छू भी नहीं सकता।"
अजय ने राहत की सांस ली, मगर उसके दिल में डर का एक बीज पड़ चुका था—
"क्या पता एक दिन रिया उस लड़के की बात मान ही ले? मैं क्या करूंगा?"
कहानी: "अधूरी मोहब्बत का सफर" (भाग 3)
रिया और अजय का रिश्ता अब प्यार और बेचैनी के बीच झूलने लगा था।
अजय का दिल रिया के लिए पागल था। वह हर वक्त बस यही सोचता—
"वो क्या कर रही होगी? किससे बात कर रही होगी? कहीं उस लड़के से तो नहीं?"
सोशल मीडिया का डर
एक दिन अजय ने देखा कि रिया ने अपनी नई तस्वीर स्टोरी में लगाई है।
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन अजय को वो मुस्कान किसी और के लिए लगने लगी।
अजय ने तुरंत फोन किया—
"रिया, मैंने कहा था न, अपनी पिक्चर्स बार-बार मत डाला करो। लोग गलत सोचते हैं।"
रिया ने हंसकर जवाब दिया—
"अजय, मुझे अच्छा लगता है। मेरी लाइफ है, मैं क्यों किसी से डरूं? तुम जानते हो न, मेरा दिल सिर्फ तुम्हारा है।"
अजय चुप हो गया। उसकी चुप्पी में डर था।
"क्या मैं ज्यादा पजेसिव हो रहा हूं? पर क्या करूं, मैं उसे खो नहीं सकता।"
रिया की व्यस्तता और अजय की बेचैनी
अब रिया अक्सर कहने लगी—
"अजय, आज दोस्तों के साथ हूं, बाद में बात करती हूं।"
या
"अभी मम्मी-पापा के पास बैठी हूं।"
अजय हर बार समझने की कोशिश करता, मगर अंदर ही अंदर टूटने लगा।
रात में जब रिया थोड़ी देर बात करके सोने के लिए कहती, तो अजय का दिल दुखता।
"रिया, थोड़ी देर और बात कर लो न। तुम्हारे बिना नींद नहीं आती।"
रिया हंसकर कहती—
"तुम बच्चों की तरह जिद करते हो। चलो, कल ज्यादा बात करेंगे।"
अजय फोन रखते ही उदासी में डूब जाता। वह रातभर जागता, छत पर बैठकर तारों को देखता और सोचता—
"काश, रिया यहीं होती। उसके साथ हर लम्हा जिया होता।"
वो रात का झगड़ा
एक रात, जब अजय ने रिया से मिलने का जिक्र किया, रिया ने कहा—
"अभी टाइम नहीं है। घर में सब व्यस्त हैं।"
अजय नाराज हो गया—
"रिया, पहले तुम मुझे समय देती थीं, अब सब बदल गया है। कहीं तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगी?"
रिया नाराज होकर बोली—
"तुम्हें हमेशा डर क्यों रहता है? मैं तुमसे प्यार करती हूं, फिर भी तुम्हें भरोसा नहीं है।"
फोन कट गया। अजय की आंखें नम हो गईं।
थोड़ी देर बाद रिया का मैसेज आया—
"पागल हो क्या? मैं गुस्से में थी। मुझे भी तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता।"
दोनों की बातें फिर प्यार में बदल गईं।
लेकिन अजय के दिल में डर अब और गहरा हो चुका था।
कहानी: "अधूरी मोहब्बत का सफर" (भाग 4)
अजय और रिया की दुनिया अब भी प्यार से भरी थी, लेकिन अजय के दिल का डर हर दिन बढ़ता जा रहा था।
उसे लगता था कि रिया की दुनिया धीरे-धीरे उससे दूर खिसक रही है।
अचानक आई खबर
एक दिन रिया का फोन लंबे समय तक नहीं आया।
अजय बेचैन होकर खुद ही कॉल करने लगा।
शाम को आखिरकार रिया ने कॉल उठाया, लेकिन उसकी आवाज पहले जैसी नहीं थी।
"अजय, मुझे तुमसे कुछ कहना है…"
अजय का दिल धक-धक करने लगा।
"क्या हुआ रिया? तुम ठीक हो न?"
"मेरी शादी तय हो गई है।"
ये सुनकर अजय का दिमाग सुन्न हो गया।
कुछ पल चुप्पी छाई रही।
"रिया… ये… ये क्या कह रही हो?"
"अजय, पापा ने फैसला कर लिया है। मैं मना नहीं कर सकती।"
अजय की आंखों में आंसू आ गए।
"रिया, तुम जानती हो न, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी पाऊंगा।"
"अजय… मैं तुमसे प्यार करती हूं। पर मैं अपने परिवार के खिलाफ नहीं जा सकती।"
यह कहते हुए रिया की आवाज कांप रही थी।
अजय का टूटना
फोन रखने के बाद अजय छत पर गया। आसमान की ओर देखा।
"क्या यही प्यार का अंजाम है? क्या मेरा सारा सच्चा प्यार बस एक कहानी बनकर रह जाएगा?"
उस रात उसने कुछ नहीं खाया, किसी से बात नहीं की।
हर बार उसकी आंखों के सामने रिया की हंसी, उसकी बातें घूमने लगीं।
वो बार-बार रिया का मैसेज पढ़ता:
"अजय, तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे।"
शादी का दिन
रिया की शादी के दिन अजय अकेले अपने कमरे में बंद था।
उसने अपने फोन में उनकी पुरानी बातें, कॉल रिकॉर्डिंग्स सुननी शुरू कर दीं।
उसका दिल रो रहा था, लेकिन वो खुद को रोक नहीं पा रहा था।
"रिया अब किसी और की हो गई। मेरा सबकुछ छिन गया।"
उसने एक आखिरी मैसेज लिखा:
"रिया, मैं हमेशा तुमसे प्यार करूंगा। तुम्हारी हंसी मेरी आखिरी याद होगी। खुश रहना।"
कहानी: "अधूरी मोहब्बत का सफर" (भाग 5 – अंतिम अध्याय)
रिया की शादी के बाद अजय की दुनिया जैसे रुक गई थी।
उसके कमरे की दीवारों पर अब भी रिया की हंसी गूंजती थी, फोन में उनकी पुरानी कॉल रिकॉर्डिंग्स, चैट्स और तस्वीरें उसकी सबसे बड़ी पूंजी बन चुकी थीं।
हर रात की तड़प
रात को जब सब सो जाते, अजय चुपचाप छत पर चला जाता।
तारों को देखता और खुद से कहता—
"रिया, तुम वहां हो न… किसी तारे की तरह? क्या तुम मुझे देख रही हो?"
कभी पुरानी चैट्स पढ़कर रो पड़ता, कभी रिया की आवाज़ को रिकॉर्डिंग में सुनकर दिल फाड़कर रोने लगता।
वह अपने दोस्तों से दूर हो गया।
खाना-पीना कम हो गया, नींद गायब हो गई।
वियोग का दर्द
अजय कई बार खुद को समझाने की कोशिश करता—
"रिया अब खुश है। यही काफी है।"
लेकिन उसके दिल की सच्चाई कुछ और थी।
"मैं उसके बिना कुछ नहीं हूं। वो ही मेरी सांस थी।"
वह अक्सर रिया को मैसेज टाइप करता, लेकिन भेज नहीं पाता।
कभी सिर्फ लिखता—
"रिया, आज बहुत याद आ रही हो।"
फिर खुद ही डिलीट कर देता।
प्यार में आखिरी कदम
समय बीतता गया, और अजय की हालत बिगड़ती चली गई।
डॉक्टर ने कहा—
"तुम्हें आराम की जरूरत है।"
लेकिन अजय किससे कहता कि उसकी असली बीमारी रिया की यादें हैं?
एक रात, अजय ने आखिरी बार रिया की तस्वीर को देखा।
उसकी आंखों में आंसू थे, होंठों पर हल्की मुस्कान।
उसने फोन उठाया और लिखा—
"रिया, तुम मेरी आखिरी मोहब्बत हो। अब मैं थक गया हूं। तुम्हारे बिना ये जिंदगी अधूरी है। खुश रहना, मेरी जान।"
सुबह जब सूरज की किरणें आईं, अजय की आंखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थीं।
वह रिया के प्यार के वियोग में चला गया।
अधूरी मोहब्बत, अमर हो गई।
रिया को जब यह खबर मिली, वह घंटों रोई।
शायद वह समझ गई थी कि सच्चा प्यार कभी मरता नहीं, चाहे उसका साथ मिले या न मिले।
🖋️ राजमणि भारती






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