आज फिर तेरी याद आ गई

आज फिर तेरी याद आ गई
जनता हूँ पराई है 
फिर भी तेरी याद आ गई
निशा की शुरमई चादर ओढ़ कर
चाँदनी रात में खो गई
बड़ी जद्दोजहद है मन मे 
कब मेरे दामन से तू रूठ कर चली गई
आज फिर तेरी याद आ गई
आज फिर तेरी याद आ गई

धूप से नाता भी बना नही पाया
कब धूप बेवफा बन कर दामन जला गई
देखा जब तुझे किसी और की चौखट पर
तो तू क्यों खुद से शर्मा गई
आज फिर तेरी याद आ गई
आज फिर तेरी याद आ गई

क्या पुख्ता कर रही है मेरे जिंदगी के चार पल
तेरे न आने से आज मेरे जान पर बन गई
जानता हूँ तू रईशो की शागिर्द बन गई है
मुफ़्लिशो को तू तो हमेशा ललचाती रह गई
आज फिर तेरी याद आ गई
आज फिर तेरी याद आ गई

वो जो दफन है आज ज़मी में
तेरी दीवानगी उसे मार गई
ख्वाहिश अभी बाकी है "राज" की
कब आगोश में हया आ गई
आज फिर तेरी याद आ गई
आज फिर तेरी याद आ गई
           
                   🖊️राजमणि भारती