वो बचपन के दिन
😀क्या आप को #1जुलाई याद है,नहीं होगी आखिर जिंदगी की रफ्तार जो तेज हो गई है,
बात उन दिनों की है जब हम छोटे बच्चे हुआ करते थे,
😑1 जुलाई आते ही हम सभी अपने अपने बस्ते अनमने मन से तैयार करते,
2 महीने की छुट्टी समाप्त हो गई थी,फिर भी ऐसा लगता की जैसे अभी छुट्टियां शुरू ही नही हुई है,
😩जाने की इच्छा तो नही थी मगर पड़ोस का श्याम तैयार होकर घर आ गया।
😡बस फिर क्या था मम्मी के हाथ में गोबर लगा था उठा लिया डंडा ,चिल्लाती हुई आ गई ,क्या रे तू नही जायेगा क्या,
🥰कपड़े के एक टुकड़े में 2 रोटी ओर आम का अचार ,1 भेली गुड दे कर मां फिर से घर के कामों में लग जाती,
😡और बीच बीच में चिल्ला देती की तू अभी गया नही,
😑जैसे तैसे हम कुरता (हमे नही पता था कि जिन्हें हम कुरता बोल रहे है उसे शर्ट कहते है) पहन लेते ऊपर नीचे बटन टांक लेते
😑और कडू का तेल (सरसो का तेल) लगा लेते, चेहरे पर आगे खूब सारा तेल लगा होता कान के पीछे बाकी रह जाता था,
पैरो में आगे लगा लेते मगर पीछे छूट जाता था,
😂एक बात है की पैरो में तेल लगाना नही भूलते थे आखिर उसी से तो पता चलता था की,हम नहाए हुए है ,
😩भले स्कूल पहुंचते पहुंचते रास्ते का सारा धूल उसमे चिपक जाए, ये प्रकिया करनी रोज थी,
❤️तो किसी तरह से पुराना झोला और कुछ पुरानी किताबो के साथ,
😩मुंह बना कर तैयार हो जाते मन ही मन श्याम को गालियां देते हुए उसी के साथ चल देते थे,तो कुछ ऐसे होती थी जुलाई की शुरुवात,
😃स्कूल में कुछ नए दोस्तो से मुलाकात होती कुछ पुराने दोस्त स्कूल छोड़ कर चले जाते थे,
बाद में पता चलता की पुराने दोस्त किसी दूसरे स्कूल में दाखिला करवा लिया है ,
फिर नए दोस्त मिलते उनसे दोस्ती होती,
तो ऐसे आती थी जुलाई,


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