प्यारी ………,
शायद यह ख़त उस वक़्त तुम्हारे हाथ आए
जब ज़िंदगी किसी और मोड़ पर होगी।
इसलिए आज कुछ माँगने नहीं,
सिर्फ़ शुक्रिया कहने के लिये लिख रहा हूँ।
शुक्रिया —
कि तुम मेरी ज़िंदगी में आईं।
शुक्रिया —
कि कुछ पल ऐसे दिए
जिन्हें याद करते ही दिल हल्का हो जाता है।
मैं यह नहीं कहूँगा कि मुझे कभी भूलना मत,
क्योंकि सच्चे एहसास
कहने से नहीं, अपने आप रह जाते हैं।
अगर कभी ज़िंदगी में
भीड़ के बीच भी अकेलापन महसूस हो,
तो बस इतना याद कर लेना —
किसी ने तुम्हें
बिना किसी शर्त, बिना किसी स्वार्थ
सिर्फ़ तुम्हारे होने भर से चाहा था।
मैं तुम्हारी ख़ुशी के रास्ते में
कभी साया नहीं बनना चाहता।
जहाँ रहो, जैसे रहो,
दिल से मुस्कुराती रहो —
यही मेरी सबसे बड़ी दुआ है।
और हाँ…
अगर कभी किसी मोड़ पर
ख़ुद को थोड़ा थका हुआ पाओ,
तो समझ लेना
कहीं न कहीं
मेरी दुआएँ तुम्हारे साथ चल रही हैं।
यह ख़त
कोई वादा नहीं,
कोई बंधन नहीं,
बस एक सच्ची याद है
जो शोर नहीं करती
लेकिन दिल में
चुपचाप जगह बना लेती है।
तुम्हारी ख़ुशी की कामना के साथ,
— सिर्फ "राज"
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