मैं जीवन भर भटकता ही रह गया, सच्चे प्यार की तलाश में ऐसा नहीं की मुझे प्यार नहीं मिला, प्यार मिला मगर मैने उसे कभी पहचाना नहीं, बचपन में मैने अपने दोस्तों से जो सीखा घर के जिस माहौल में पल था उसका मेरे जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव रहा,
मेरा जीवन हमेशा दूसरों के लिए ही रहा लोगो को खुश देखना और लोगो की खुशियों के आगे अपनी खुशियों का परित्याग कर देना मेरी प्रकृति थी, और यही मेरी प्रकृति मेरे दुख का कारण बन जाती थी,
मैं हमेशा से गलतियां करने के बाद पछताता हूं, यह आदत शुरू से मेरे अंदर विद्यमान थी, समय रहते मैं कभी सही फैसला नहीं ले पाता था, मैं अपनेपन और प्यार के लिए जीवन भर भटकता ही रह गया, लोगो ने मेरे इस भटकाव का पूरा फायदा उठाया, मेरे साथ रहने वाला मुझे जल्दी ही समझ जाता था कि मैं किस तरह का इंसान हूँ,
जो भी मेरे जीवन में आया मुझे उपयोग में लिया एक वस्तु की तरह,
कहानी की शुरूआत होती है मेरे विवाह के बाद से सच्चे प्यार के लिए मैं हमेशा बेचैन रहता था, ऐसा नहीं था कि मेरी पत्नी मुझे प्यार नहीं करती थी, वह मुझे प्यार करती थी मगर मैं उसके प्यार को कभी समझ ही नहीं सका, वह थी गांव देहात की एक अनपढ़ औरत और मैं था शहर में पैदा हुआ पढ़ा और मेरा जीवन हमेशा से आधुनिकता की ओर रहा,
कारण यही था जो मैं हमेशा अपने लिए एक आधुनिक पत्नी की तलाश में रहा ।
मैं सोचता था कि मेरी पत्नी शरारती हो अदाएं हो शर्मीली हो मुझे डांटने वाली हो मेरा ख्याल रखने वाली हो,
लेकिन ऐसा उनके अंदर कुछ नहीं था , वह एक शुद्ध देहाती धर्मपत्नी थी, वह एक जिम्मेदार औरत थी, घर के काम करना घर के लोगो का ख्याल रखना बच्चे पालना और मेरे प्रति उसका जो धर्म हो उसे अपनी जिम्मेदारी समझ कर निभाना,
और इसे वह बखूबी करती थी ,
तो एक भटका हुआ मन उसी तरह होता है जैसे मंजिल से खोया हुआ राहगीर,
मैं इसी भटकाव भरी जिंदगी को जी रहा था कि मेरे जीवन में एक सोलह सत्रह साल की लड़की आती है,
उसने मेरे दिल और मुझे बहुत करीब से समझा, इतना ज्यादा कि उस तरह से जैसे कभी किसी ने मुझे समझा ही नहीं था, उसे मेरी हर इच्छा का अंदाजा बिना बोले ही हो जाता था,
उसके अंदर कोई शरारत नहीं थी कोई बनावटी पन नहीं था, वह जो थी समुचित मेरे सामने थी , सादगी से लबरेज उसका जीवन मुझे बहुत ही प्रभावित कर रहा था मुझे उसकी हर बात इस तरह से लगती जैसे वो मेरे शरीर का एक हिस्सा है ,
मैं उससे प्यार करने लगा और अपने प्यार को जाहिर करने के तरीके ढूंढने लगा ,
आखिरकार एक दिन मेरे दोस्त मनोज ने हिम्मत बढ़ाई और मैंने अपने अंदर से सारी शर्मो हया को निकाल फेंका , और उसका हाथ पकड़ कर उसमें लिखा कि do you love me..?
उस लड़की का नाम नूपुर था, नूपुर आंखे झेंपते हुई आगे बढ़ गई, मैं एक पल के लिए डर गया, कि कहीं ये मेरे घर में किसी से बता न दें ,
क्योंकि मैं एक विवाहित पुरुष था तब मेरी उम्र 25 - 26 रही होगी मैं उससे लगभग 8 साल बड़ा था, और वह कुंवारी थी,
मैं इसी डर में पूरी एक रात बिता डाली मगर उसके तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई,
जाते हुए उसने मुझे एक पत्र दिया और उसमें लिखा कि आपने बहुत देर कर दी यह कहने में मैं अब कुछ नहीं कर सकती हूँ मेरी सगाई हो चुकी है, लेकिन यह सच है कि मैं भी आप से प्यार करती हूँ,
परन्तु अब कुछ नहीं हो सकता है, और आखिरी में उसने लिखा "लव फॉरएवर"
और फिर हम दोनों अलग हो गए करीब साल भर के लिए मेरे प्यार को अब हिम्मत मिल चुका था उसने यह स्वीकार कर लिया था कि मैं भी आप से यार करती हो और हमेशा करती रहूंगी,
यही दो शब्द मेरी ताकत बन रही थी, धीरे धीरे हमारी बातें शुरू हुई उस समय इनकमिंग कॉल का भी पैसा लगता था और तब पीसीओ का दौर था, उनके पास इतने पैसे नहीं थे और न ही इतनी आजादी की हर वक्त मुझसे प्यार की बाते कर सके,
वो अपनी पॉकेट मनी इकट्ठा करके महीने दो महीने में कभी बात करती थी, तब मैं मुंबई में ऑटो ड्राइवर हुआ करता था,
हर सुबह मुझे उसकी याद आ जाती हर दिन मैं उसका इंतजार करता था, मगर हर दिन उनसे बात तो नहीं होती थी, और जब होती तो बस मेरा हाल समाचार और उसकी खामोशी वह सोचती थी कि मैं कुछ प्यार की बात करूं मगर मैं ठहरा गंवार मुझे बाते करना आता ही नहीं था बस उनकी सुनाना चाहता था, मगर एक जो अद्भुत बात उनके अंदर थी वह थी कि जब मैं उनसे कुछ भी प्यार की बात करने की कोशिश करता वो मुझे रोक देती और कहती कि मत कुछ कहो मैं जानती हु आप क्या कहोगे,
वह हर बार मेरे सेहत और खुशामदी का हाल चाल लेती थी, कॉल हमेशा उनका ही मुझे आता था , मैं चाह कर भी कर नहीं पाता था क्योंकि उनके घर से वह पीसीओ लगभग एक किलोमीटर दूर था , जब वो स्कूल या मार्केट जाती तो मुझसे बाते कर पाती थी ,
वो कभी 1 जनवरी दिवाली होली ऐसे कई त्यौहार होते थे , जिन दिनों वो किसी न किसी तरीके से मुझसे बात कर लेते और शुभकामनाएं देती थी, लेकिन कभी प्यार की बात यार कि शरारत कभी नही करती,
उनका कॉल मुझे मेरी आवाज और मेरे अल्हड़पन सुनने के लिए आता था मेरा स्वच्छंद जीवन और जो मन में आए बोल देना मेरी कलात्मक जीवन शैली उन्हें शायद पसंद था ,
और वो अपने दिल के हाथों मजबूर थी, प्यार हमारा इसी तरह दूर रह कर चलता रहा, एक बार मैं उनके घर गया था मुझे नीद नहीं आ रही थी , यह उन्हें पता था कि मैं उनके लिए बेचैन हो रहा हूँ मैं बार बार कभी पानी तो कभी चद्दर का बहना लेकर उनके पास चला जाता वो अपने कामों में मशगूल थी, मगर उनका भी ध्यान मेरे ऊपर पूरा था सभी खा पीकर अपने अपने विस्तार पर चले गए थे , और मैं अपने विस्तार पर तड़प रहा था उन्हें छूने के लिए, और आखिरी में हिम्मत करके मैं एक बार फिर गया, और उनसे पानी का बहना ले कर गया, उनसे पानी मांगा वो पानी लेकर आई मेरे आंखों की प्यास वो समझ रही थी वहां कोई नहीं था , पानी देते हुए उन्होंने मुझसे कहा कि जब हिम्मत नहीं है तो ऐसे क्या देख रहे हो।
मैं उनकी शक्ल को बस देख रहा था जैसे खो गया था , पानी देते हुए उन्होंने कहा पानी लो और जाओ ये चद्दर भी लो और मैं जा रही हूँ सोने अब मत परेशान करना , सहसा मुझे लगा कि उसने मुझे कुछ कहा था , मैं उन्हें फिर से वही बात दोहराने के लिए कहने लगा वो बोली कि कुछ नहीं कहा जब सुने नहीं तब जाने दो,
मैं उनको देखते ही अपना मानसिक संतुलन खो देता था मुझे उनके शक्ल को देखने के आगे कुछ भी समझ में नहीं आता था, जब मैं पानी पी कर जाने लगा तब उन्होंने मुझे बताया कि "जब हिम्मत नहीं है तो देख क्या रहे हो" यही कहा था, और इतना कहते हुए मुस्कराते हुए उसने दरवाजा बंद कर लिया था, फिर मैं अपने विस्तार पर गया और बहुत पछताने लगा कि मेरे सामने खुला आमंत्रण था तो आखिर एक बार उसे गले क्यों नहीं लगाया, मैं समझ गया कि मैं उनके सामने खुद को ही भूल जाता हूँ, और सुबह जब हुआ तो हम घर चले आए,
इसी तरह हमर प्यार उनसे चल रहा था, दोनों कभी एक दूसरे को छुआ नहीं मगर छूने कहीं अधिक आनंद की अनुभूति होती थी, इसी तरह हमारा समय गुजर रहा था,
और एक दिन ऐसा आया कि उनकी शादी का दिन करीब आ गया वो मुझे एक महीना पहले ही बुलाई थी,
मैं उन दिनों मुंबई में रहता था, मगर जब उनका पत्र मिला तब मैं घर आ गया, और घर की उलझनों में ऐसा उलझा कि मैं उनसे मिल न सका वो मुझसे शादी से महीनों पहले मिलना चाहती थी , मगर मैं अपनी अतनी और बच्चे को छोड़ कर जा न सका क्योंकि तब मेरे घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी , कभी कभी हम लोग बिना खाए भी सो जाया करते थे,
विवाह का दिन करीब आ गया और उनके शादी के दो दिन पहले मैं उनके घर गया,
वो मुझे देखते ही गुस्से में घर का दरवाजा अंदर से बंद कर ली घर वाले के बहुत मानने पर उसने दरवाजा खोला मैं अंदर गया वो मुझे पकड़ कर रोने लगी उसके बदन पर हल्दी लगा था मेरे कपड़े में भी लग गया ,
वो रो रही थी रोते हुए उसने कहा कि अब क्यों आए हो विवाह बीत जाता तब आते, मैने उसे चुप कराया वह चुप तो हो गाई,
मगर उसके अंदर जो एक तड़प तकलीफ थी मुझसे मिलने और बात करने की वो मैं नहीं समझ पाया, मैं तो यह भी नहीं समझ पा रहा था कि आने वाले 3 दिनों में वो दूर चली जाएगी,
मैं अल्हड़ मस्त हंसता हुआ बाहर चला आया और शादी की तैयारी में उनके घर वाले का सहयोग करने लगा ,
वो दिन मुझे याद है वो विवाह तो कर रही थी मगर उसकी नजरें हमेशा मुझे ढूंढ रही थी वो अंदर ही अंदर रो रही थी मुझसे बिछड़ जाने का उसे अहसास था ,
मगर मैं एकदम से इससे अंजान था और मस्त था शादी के कामों में आखिर वो पल भी आया जब उसके मांग में सिंदूर डाला जा रहा था मैं उसके सामने ही था , सहसा मुझे झटका लगा कि ये तो गई अब पराई हो गई और मेरी आँखें भरने लगी जैसे तैसे मैने उस पल खुद को रोक मेरा हृदय अंदर से रो रहा था,
मैं तड़प रहा था जैसे जैसे सुबह हो रहा था मेरा दिल बैठा जा रहा था मुझे इस बात का अब एहसास हो गया था कि अब वो बहुत दूर जाएगी , और आखिर वो पल भी आया जब मैं उसे अपने ही हाथों उसे कार में बैठाया वो रो रही थी मेरा शर्ट पकड़े हुए थी मैं भी अंदर ही अंदर घुट रहा था मेरे आंखों के सामने वो चली गई ,
मैं वहां से गया और एक जग शराब पी गया मैंने पहले कभी शराब नहीं पी थी ,
तुरंत मुझे नशा हो गया और नशे की हालत में उसे याद कर कर के खूब रोया मेरे आंखों में उसका ही चेहरा बस रहा जाने कब मै सो गया,
उसके बाद जब आंख खुला फिर से वो मुझे रोते हुए दिखाई देने लगी फिर मैने शराब पिया और इसी तरह मैं शराब पीना सीख गया ,
उसके जाने का गम तब कम हुआ जब वो अपने ससुराल से मुझसे बात की और मुझे हिम्मत दी कि मेरा प्यार सिर्फ आप हो और आप ही रहोगे जीवन में कोई भी आप की जगह नहीं ले पाएगा, फिर उसके बाद समय गुजरने लगा वो धीरे धीरे अपने पति के करीब आने लगी और मैं उससे दूर जाने लगा,
कब मैं उसके दिल से निकल गया मुझे पता ही नहीं चला वो अपने पति अपने बच्चों में खो गई और मेरा अधूरा प्यार मेरे सीने में ही दम तोड़ने लगा ,
समय गुजर 20 साल हो गए मैं आज भी उनकी बेवफाई के लिए उन्हें कोसते रहा और वो जब कभी बात की तो यही कहा कि आप को मैं भूली नहीं मगर अब मैं आप को समय नहीं दे सकती मिल नहीं सकती, आप अपने बच्चों और अपना ख्याल रखें,
मेरा दिल अब यह मान गया था कि वो मुझे भूल गई बीच में मुझे उसके ऊपर शक भी हुआ कि वो अपने से आधे उम्र के किसी लड़के को चाहती है, मगर यह शक मेरा गलत था ऐसा नहीं था वो आज भी पाक और पवित्र थी, और वो आज भी मेरे सलामती के लिए दुवा करती थी,
वह एक समझदार गृहिणी और प्रेमिका थी उसने मेरा घर बचाने के लिए मुझसे दूरी बना ली ,
मगर मैं प्यार के लिए तड़पता ही रहा मैने उसे अपने दिल से निकाल दिया ,
समय ऐसा आया कि मुझे उससे नफरत हो गई बात बंद हो गई और मुलाकात खत्म हो गई , दो साल गुजर गए इसी तरह
तभी मेरे जीवन में एक और लड़की आती है , जिसने मेरे अंधेरे जीवन में प्रकाश से भर दिया मेरे पहले प्यार की सारी कमी उसने पूर्ण कर दी, वह इतनी सुंदर थी कि मैं उसे देखते ही उसके साथ जीवन भर के सपनो में खो गया,
उसकी बातें मेरे ऊपर हावी होने वाली थी मैं चाहता था कि कोई मुझसे प्यार करे कोई मुझ पर अपना हक जताए और वो सब करने लगी उसने मेरे आने जाने खाने वन रहने सब पर अपना हक जताने लगी , मैं अपने दिल की सारी बातें उससे बताने लगा मैने उससे कभी कोई पर्दा नहीं किया ,
मैंने अपने इज्जत को भी उसके सामने खोल कर रख दिया , जो बाते कभी मैने अपने दोस्तों से नहीं बताया था उन बातों को मैं उनसे कह देता , कभी कभी मैं अपनी और अपनी पत्नी के बीच की बाते भी उनसे कह देता मुझे उनके ऊपर बहुत भरोसा हो गया ,
मगर वो कभी अपने मन की बात मुझसे नहीं कहती मेरा उनसे इस बात को लेकर अक्सर झगड़ा हो जाता था,
परंतु मेरे एक इशारे आर वो मेरे लिए हाजिर कर देते थे, मेरा हक उनके जिस्म पर हो गया था मगर उनका मन मेरा कभी नहीं हुआ,
इस बात को मैं बार बार अहसास कर रहा था , क्योंकि वो हर बात पहले मुझसे छुपाती उसके बाद बताती,
कही न कही वो मुझसे अपनी बातें छुपाया करती थी ये मुझे अहसास होता था, जब मेरा उनसे बात कॉल पर होता तो वो मेरा कॉल रोक कर किसी का भी कॉल उठा लिया करती थी,
धीरे धीरे हम दोनों ने प्यार की हद पर कर दी और दो से एक हो गए,
एक दिन उनकी शादी तय हो गई अब वो मुझसे दूर होने लगी समय कम कर दी बाते आधे से ज्यादा बंद हो गई , अब जब कभी बात होती तो सिर्फ झगड़ा होता मिलना बंद हो गया,
मैं उनके लिए रात दिन तड़पने लगा रोता डिप्रेशन में कई बार गया, खाना पीना सोना सब हराम हो गया,
उनका मोबाइल उनके हाथ से छीन गया , कई दिनों तक उन्होंने मुझसे बात नहीं की मुझे लगने लगा कि मेरे प्यार और उनके यार में अंतर है मैं इतना तड़प रहा हूँ, और वो क्यों नहीं, मैं समझने लगा कि कोई तो कारण होगा, फिर जाके मुझे कुछ बाते पता चलने लगी कि ये शादी से पहले कई लड़कों से बात कर चुकी है और इस बात की पुष्टि उसने खुद ही मुझसे कई बार किया , कि बहुत लड़के मेरे पीछे पड़े थे मगर कोई मुझे पटा नहीं सका ,
मैने उनके मोबाइल में कई नाम ऐसे देखे जो अजीब नमो से सेव थे पूछा तो उसने कहा कि , मैं किसी का असली नाम से नंबर सेव नहीं करती हूँ,
फिर एक लड़के के बारे में उसने खुद ही बताया एक उसके पड़ोस का था जो उसके लिए पागल हो गया था उसे अभुक्त पैर करता था , जब इनसे पूछा कि आप भी करती थी कहा कि नहीं मैं तो उसे भाई की तरह देखती थी,
फिर यह भी बताया कि कभी उसे राखी नहीं बांधे है, जब की घर से सटा हुआ घर घर था ,
ये बाते मेरे मन में संदेह पैदा कर ही दी थी, कुछ और लड़के जो उनके मामा के घर से थे उन्होंने खुद ही बताया था कि वो भी मुझे चाहता था मगर उसकी शादी हो गई जिस दिन शादी था उस दिन वो भी अपने यार का इजहार इनसे कर दिया था ,
और उसका नंबर भी इनके मोबाइल में सेव था और पहले वाले लड़के का भी नंबर इनके मोबाइल में सेव था , पहले वाले लड़के ने तो वेलेंटाइन डे के दिन गुड मॉर्निंग मैसेज भी किया था इन्हें और उसका नंबर ये व्हाट्स पर आर्काइव कर के रखे थे , जिसे मैने देखा,
दूसरा जो इनके मामा के घर का था वो 20 बार 13 बार 10 बार दिन में एक बार कॉल कर देता था जब की उसका नंबर मैने इनके मोबाइल से ब्लॉक कर रखा था , मैसेज में कॉल दिखा रहा था जो उन्होंने मुझे भेजा था,
एक बार मैने इनका इंस्टाग्राम लॉगआउट किया तो देखा कि वहां पर एक और आई डी किसी लड़के की लॉगिन थी जिसका पासवर्ड उच्च तो कहा कि मुझे नहीं पता कि ये कैसे मेरे मोबाइल में आ गाय है,
मैं हर बात इनका मान लेता था मुझे लगता था कि कुछ भी हो ये मुझे प्यार तो करती है, उछाले जीवन में कुछ भी की होगी मगर आज तो नहीं कर रही है,
फिर इनका विवाह का डेट निश्चित हो गया और ये अपने हसबैंड से खुद घंटों घंटों तक बात करने लगी,
टाइम मिलने पर ये मुझसे भी झगड़ा कर लेती थी मेरे पहले प्यार को लेकर की तुम उससे अभी भी बात करते हो उससे मिल रहे हो , मैने इस बात का उसे कई बार विश्वास दिलाया कि ,
मैं अब या वो अब मुझसे प्यार नहीं करते है वो अपनी दुनिया में खुश है और जो प्यार समर्पण तुमने मुझे दिया है , उसके सामने उनका कुछ भी नहीं है, अगर तुम्हे विश्वास न हो तो चलो मेरे साथ मैं सब को छोड़ कर तुहरे साथ अभी चलने को तैयार हूँ , कसमें जिसकी चाहो खिलवा लो,
मगर वो हर बार इसी बात को लेकर झगड़ा करने लगी, इधर इनके जीजा से भी इनका बहुत अच्छा संबंध था जो कि इनका सगा जीजा नहीं था इनके मौसी का दामाद था मगर वो इनके लिए जान छिड़कता था,
एक बार इन्होंने मुझे कॉन्फ्रेंस में लेकर बड़े सादगी से बात किया भी था ऐसा लगा कि जैसे वह बहुत इनका सम्मान करता है और इन्होंने कहा कि वो मुझसे बहुत बड़े है, उनके बारे में ऐसा मत सोचो,
मगर वह यह भूल गई कि बड़ा तो मैं भी था फिर भी प्यार हमारा हो गया न,
और जिस तरह से ये अपने जीजा से बात मुझे कॉन्फ्रेंस में लेकर करी थी उसी तरह तो ये मुझे भी सिखाई थी कि तुम मेरे घर और भाभी के सामने बात करना और जैसे अपने जीजा से बड़े अदब और शालीनता से पेश आई थी वैसे ही ये मुझसे बात करते हुए अपने घर वाले के सामने नाटक करती थी,
फिर भी मैंने इसे नजर अंदाज कर दिया , मुझे लगा कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता है वो गलत नहीं होगी,
एक दिन मुझसे वो चैट कर रही थी चैट के समय उसने मुझे अपने जीजा से कॉल पर हो रहा है इसका स्क्रीनशॉट भेजा ,
मुझे ताज्जुब हुआ कि जो इनके इंस्टाग्राम की आई डी थी वो इनके जीजा के नाम से ही था,
अब मेरा शक और हो गया कि हो न हो इनका इनके जीजा से कोई न कोई संबंध है,
और वो इंसान हर दिन दिन में कम से कम 2 बार कॉल तो कर ही लेता था,
इधर मेरा इनसे बात का टाइम खत्म हो रहा था सुबह का गुड मॉर्निंग खत्म हो गया रात का गुड नाइट खत्म हो गया
मुझे इन्होंने कहा कि आप कोई मैसेज मत करना ना मुझे कोई कॉल करना जब तक मैं सामने से आप को न करूं,
मैं तो प्यार का मारा था हर वो काम करता जो ये कह देती मगर बिना बात किए मैं दिन रात उनके बारे में सोचते रहता था,
मैने उन्हें इंस्टाग्राम आई डी प्राइवेट करने के लिए कहा उन्होंने नहीं किया एक दो तीन ऐसे लोग थे जिन्हें मैं बार बार इनसे कहता कि उन्हें ब्लॉक कर दो मगर ये न करती न उसे अनफॉलो करती बहुत कहता तो अनफॉलो कर देती अगले दिन खुद ही उसे फॉलो कर लेती थी , कई बार कहा कि बताओ वो कौन है जिसे तुम हटा नहीं रही हो वो नहीं बताई और उसे फॉलो करती रही और आखिर में मैं थक गया इनके इस आदत से, स्नैप पर अंजन लोगो को जोड़ना उनसे बात करना इंस्टाग्राम पर अंजान लोगों को जोड़ना और अपनी स्टोरी ओपन रखना और यह देखना कि कितने लोग लाइक कर रहे है कितने लोग देख रहे है इसे चेक करते रहना , ऑनलाइन रहना मगर मुझसे कोई बात न करना बल्कि मेरे ऑनलाइन आते ही खुद ऑफलाइन हो जाना ,
आई डी में हमेशा नए लोगों को जोड़ते रहना और आई डी को पब्लिक रखना इन्हें अच्छा लगता है, ये कहां जा रही है मुझे नहीं बताएंगी मुझसे पूछते रहेगी कि तुम बताओ कहां गए क्यों गए, मिलने बुलाने पर बहाना करना कि आ नहीं सकती हूँ और खुद दूर दूर तक घूमने जाना, ये सब इनकी आदतें है,
मैं जब परेशान रहूंगा तब ये खुद को दूर कर लेते है और खुद परेशान रहेगी तो मुझे नहीं बताएगी,
ये हमारा प्यार था या कोई टाइम पास मेरे समझ में खुद नहीं आ रहा था , मगर जब इनसे पहली बार मिलने की बात की तो इन्होंने मुझे बातों में घुमाया कि वर्जिनिटी लाश कैसे कैसे होती है , मैने इनसे कहा तो इन्होंने मुझे कहा कि मैं आप के साथ नहीं आ सकती अगर ऐसा कुछ करूंगी तो मेरा हसबैंड जान जाएगा तो हो सकता है वो मुझे छोड़ दें कि ये लड़की वर्जिन नहीं है, मैने उसे समझाया कि नहीं पढ़े लिखे लोगो में ऐसा नहीं है वो जानते है कि खेल कूद साइकिलिंग के दौरान वर्जिनिटी लॉस हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है,
तब जा कर ये मेरे पास आई और फिर मुझे यह अहसास हुआ कि ये वाकई में पहले से ही वर्जिन नहीं है और इनके साथ एक बार नहीं बल्कि कई बार सेक्स हुआ है,
फिर भी में इन्हें अपना लिया , मगर यह सब इनका एक चाल था जो मेरे समझ में नहीं आ रहा था , जब इनकी सच्चाई सामने आने लगी तब मेरे समझ में सभी इनकी पुरानी बाते आने लगी, एक दिन झगड़े के दौरान इनकी भाभी ने मुझे बताया कि ये क्या क्या किस किस के साथ की है मैं सब जानती हूँ,
फिर मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है और मुझे केवल एक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया गया है,
फिर भी दिल इनसे ही मेरा लगा रहा मैं इन्हें फिर भी गलत नहीं मानता हूँ क्योंकि मैने इनसे सच्चा प्यार किया है और करता रहूंगा, मगर इनके तरफ से यही होता रहा तो मेरे भी बर्दाश्त की एक सीमा है,
एक दिन ऐसा आया कि इन्होंने मुझसे खूब झगड़ किया मेरे x को लेकर मैने इन्हें विश्वास दिलाया कि बच्चों की कसमें खाया मगर वो लड़की फिर भी कहा कि नहीं जो तुमने स्टोरी लगाया है वो तुम्हारे x की है,
मैने बहुत विश्वास दिलाया मगर मैं हार गया, और अब शांत हो कर उनके आगे की राह देख रहा हूँ कि ये क्या करती है,,,
जारी है दोस्तो कहानी अभी अधूरी है पढ़ने के लिए मेरे साथ बने रहिए जल्द ही इसका अगला भाग लेकर आऊंगा
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Hi